
शिक्षा का सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य मानव का सर्वांगीण विकास शिक्षाविदों के द्वारा माना गया है। जो इस समय उपेक्षित हो रहा है, शिक्षा का दार्शनिक लक्ष्य पुरुषार्थ एवम् आत्म साक्षात्कार भी है, जिसमें जीवन के चारो पुरुषार्थ, धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष भी सम्मिलित हैं। ज्ञान एवं निपुणता के साथ जीवन को निश्चित दिशा देना तथा उचित अनुचित का विवेक जाग्रत करना भी शिक्षा का एक मूल्य उद्देश्य है। शिक्षा के अन्य उद्देश्यों में ज्ञान के साथ जीविको पार्जन की कला सिखाना एवं जीवन में उच्च मूल्यों का विकास करना भी आता है। प्राद्योगिक शिक्षा में जीविकोपार्जन की कला सिखाई जाती है, परन्तु चरित्र से जुड़ी अन्य बातों की उपेक्षा की जाती है। इन सभी बातों को दृष्टि में रखते हुए युवकों को भारत के नये स्वरूप को पहचानने, स्वच्छ चरित्र का विकास करने, अनुशासन से युक्त समाज का निर्माण करने तथा छात्र-छात्राओं के भविष्य को सत्यात्मक एवं समृद्ध बनाने के लिए हमने स्व. गया प्रसाद महाविद्यालय भभुवा-बबेरू (बाँदा) का शुभारम्भ किया है। आशा है इस संस्था के माध्यम से शिक्षा के उच्च उद्देश्यों की पूर्ति होगी।